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स्त्रियों की स्वाधीनता
₹25.00
राधामोहन गोकुल जी ने निरीश्वरवाद और कम्युनिज़्म के प्रचार अन्धविश्वास और जात-पाँत के विरोध, स्त्रियों की पराधीनता, आर्थिक वैषम्य, औपनिवेशिक शोषण से लेकर विश्व क्रान्तियों और समकालीन समस्याओं तक- सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, ऐतिहासिक, दार्शनिक प्रश्नो पर विपुल लेखन किया| उनकी रचनाओं की बेकली, उनका विद्रोही आह्वान, उनके अकाट्य तर्क आज भी पाठकों में उत्तेजना और बेचैनी पैदा कर देते हैं| गोकुल जी राष्ट्रीय जागरण के दौर में प्रबोधन की धारा के अग्र धावक थे| उनकी रचनाओं में दिदरो और वाल्तेयर जैसे प्रबोधनकारी फ्रांसीसी दार्शनिकों तथा चेर्निशेव्स्की और बेलिंस्की जैसे रूसी क्रान्तिकारी जनवादी विचारको जैसी आग दिखाई देती है| इस मायने…
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