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हिन्दी प्रदेश में राष्ट्रीय जागरण का वैचारिक आधार तैयार करने और उसे व्यापक बनाने में गणेशशंकर विद्यार्थी (1890-1931) की भूमिका अद्वितीय, और एक पत्रकार के रूप में शायद सर्वोपरि थी। विद्यार्थी जी के चिन्तन के वैविध्य, धार और गहराई के बारे में हम अलग से कुछ कहने की जरूरत नहीं समझते। पाठकों को उसकी एक झलक देने के लिए यह संकलन काफ़ी होगा। उनका जीवन एक तूफ़ानी गरुड़ का जीवन था। वह एक योद्धा मनीषी थे। पुनर्जागरण के महामानवों की तरह, वह अपनी मान्यताओं को सिरफ़ लिखकर ही सन्तुष्ट नहीं थे, उन्होंने उन्हें अपने व्यवहार में निर्भीकतापूर्वक उतारा और उसकी…
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