लाभकारी मूल्य, लागत मूल्य, मध्यम किसान और छोटे पैमाने के माल उत्पादन के बारे में मार्क्सवादी दृष्टिकोण : एक बहस

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मज़दूर अख़बार ‘बिगुल’ के पन्नों पर दिसम्बर 2002 से फ़रवरी 2005 के बीच लागत मूल्य, लाभकारी मूल्य और मँझोले किसानों के प्रति सर्वहारा क्रान्तिकारियों के दृष्टिकोण को लेकर एक महत्तवपूर्ण बहस चली थी। इस पूरी बहस को प्रकाशित करने का मूल कारण यह है कि भारत के कम्युनिस्ट क्रान्तिकारी आन्दोलन में लागत मूल्य, लाभकारी मूल्य और मँझोले किसानों के सवाल पर भारी भ्रान्ति व्यापत है। अपने को मार्क्सवादी कहते हुए भी उनकी मूल अवस्थिति नरोदवादी है। इसलिए इस प्रश्न पर सफ़ाई बेहद ज़रूरी है। यह बहस इस प्रयोजन को काफ़ी हद तक सिद्ध करेगी, इसका हमें विश्वास है। बहरहाल, सम्पादक…

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