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बम का दर्शन और अदालत में बयान
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भगत सिंह और उनके साथियों की कटु आलोचना करते हुए गांधी ने ‘बम की पूजा’ नामक लेख में वाइसराय [जिसकी गाड़ी को उड़ाने की कोशिश की गयी थी] को देश का शुभचिंतक और नवयुवकों को देश की आज़ादी में रोड़ा अटकाने वाला कहा था। इसी के जवाब में ‘एच.एस.आर.ए’ की ओर से भगवती चरण बोहरा ने ‘बम का दर्शन’ लेख लिखा और गांधी के विचारों की अवैज्ञानिकता को उजागर कर दिया। इस लेख को अंतिम रूप भगत सिंह ने दिया था।
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