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जाति-धर्म के झगड़े छोड़ो, सही लड़ाई से नाता जोड़ो
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देश देशी-विदेशी कर्ज़ से लदा है। एक ब्रिटिश साम्राज्यवाद की जगह दर्जनों विदेशी डाकू देशी धन्नासेठों के साथ मिलकर भारत की जनता की मेहनत को और हमारी इस सर्वगुणसम्पन्न धरती को लूट रहे हैं। ऊपर के क़रीब सौ बड़े पूँजीपति घरानों की पूँजी में दोगुने-चौगुने की नहीं बल्कि दो सौ गुने से लेकर चार सौ गुने तक की बढ़ोत्तरी हुई है जबकि दूसरी ओर आधी आबादी को शिक्षा और दवा-इलाज तो दूर, भरपेट भोजन भी मयस्सर नहीं है। इस बदहाली से उपजे असंतोष की आँच से अपने-आप को बचाने के लिए हुक्मरान धार्मिक कट्टरपंथ और साम्प्रदायिकता की राजनीति को खुलेआम…
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