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संशोधनवाद के बारे में
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भाकपा, माकपा और भाकपा (मा-ले) जैसी पार्टियों का नकली कम्युनिज़्म काफ़ी पहले ही बेनकाब हो चुका था। बंगाल-केरल-त्रिपुरा से लेकर केन्द्र तक इनकी राजनीति का चरित्र लोगों के सामने है। लेकिन बात सिरफ इन्हीं पार्टियों की नहीं है। सर्वहारा क्रान्ति की तैयारी से लेकर समाजवादी संक्रमण की लम्बी अवधि के दौरान संशोधनवाद नये-नये रूपों में लगातार क्रान्तिकारी मज़दूर आन्दोलन में घुसपैठ करता रहता है। मज़दूर आन्दोलन में बुर्जुआ विचारधारा और राजनीति की यह घुसपैठ स्वाभाविक है। दुश्मन सामने से लड़कर जो काम नहीं कर पाता, वह घुसपैठियों और भितरघातियों के ज़रिये अंजाम देता है। संशोधनवाद के प्रभाव के विरुद्ध सतत…
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