पतझड़ का स्थापत्य

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शशिप्रकाश की कविताओं के इस संकलन ‘पतझड़ का स्थापत्य’ में गहन वैचारिक कविताओं को स्थान दिया गया है। ‘पतझड़ का स्थापत्य’ की कविताएँ जहाँ समकालीन यथार्थ के भौतिक-आत्मिक पक्षों की गतिकी पर काव्यात्मक-वैचारिक विमर्श प्रस्तुत करती हुई भविष्य-सन्धान करती हैं। पाठकों के सामने एक ऐेसे कवि की कविताएँ होंगी जिसके लिए कविता एक घिसा हुआ सिक्का या सायास उद्यम नहीं है। ये मौजूदा वाम कविता के चालू चलन से हटकर, एक अलग ज़मीन की कविताएँ लगेंगी, क्योंकि ये घटनाओं के एकदम बीचो बीच खड़े होकर लिखी गयी कविताएँ हैं और महज़ द्रष्टा या भोक्ता की नहीं, बल्कि एक ऐसे सक्रिय…

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