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लहू है कि तब भी गाता है
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“कवि होना ऐसा है जैसे जीवन के प्रति निष्ठा रखना हर मुश्किल में मानो ख़ुद अपनी उधेड़कर कोमल चमड़ी देना लहू उड़ेल अन्य लोगों के दिल में” पाश को पढ़ते हुए हर बार सेर्गेई येस्येनिन की ये पक्तियाँ दिलो-दिमाग़ में कौंधती हैं। कवि – एक योद्धा कवि के रूप में पाश आद्यन्त यही करता रहा। जीवन के प्रति उसकी निष्ठा बरकरार रही और कविताओं के ज़रिये वह लोगों के दिलों में अपना लहू उड़ेलता रहा। यह अप्रत्याशित नहीं कि इसकी कीमत उसे अन्ततः अपने लहू से ही चुकानी पड़ी। पाश का क्रान्तिकारी मानवतावाद अन्तिम साँस तक सलामत था। अन्तिम साँस…
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