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जादू नहीं कविता
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जैसाकि इसके शीर्षक से ही स्पष्ट है, कात्यायनी कविता के रहस्यीकरण का उसी तरह से विरोध करती हैं जैसे वे माल की अन्धपूजा (कमोडिटी-फ़ेटिसिज़्म) और वर्चस्ववादी मूल्यों-मान्यताओं के मिथकीकरण का विरोध करती हैं। कात्यायनी की कविताएँ प्रतिबद्ध कविता का एक ऐसा विरल स्वर है जो कुलीन-शालीन “वाम” के घटाटोप में एकदम अलग दीखता है और आलोचना जगत के पीठासीन महामहिमों के सामने लगातार असुविधाएँ पैदा करता रहता है। लेकिन चुप्पी की तमाम साजिशों के बावजूद, इन कविताओं की लोकप्रियता लगातार बढ़ती रही है। जिस कविता की आत्मा लोगों के निकट होती है, उसे एक काव्यद्रोही समय में भी लोगों तक…
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