इन्द्रधनुष

65.00

विगत शताब्दी के पाँचवे-छठे दशक में वान्दा वैसिल्युस्का की इस कृति की, सोवियत संघ के अतिरिक्त दुनिया के अन्य देशों में भी काफ़ी चर्चा हुई थी और इसकी गणना नात्सीवाद के विरुद्ध सोवियत जनता के स्मारकीय शौर्यपूर्ण प्रतिरोध-संघर्ष का चित्रण करने वाली उत्कृष्टतम कृतियों में की जाती थी। आज, प्रतिगामी शक्तियों के अनाचारी वर्चस्व वाले हमारे समय में, समाजवाद की उपलब्धियों और सोवियत जनता द्वारा बेमिसाल क़ुर्बानियों के बाद नात्सियों को नेस्तनाबूद करके पूरी मानव सभ्यता की हिफ़ाज़त करने की घटना को यदि पूरी तरह से विस्मृत नहीं किया जा सका है तो कम से कम उसके ऐतिहासिक महत्व का…

Additional information

Author

Publication