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धर्म के बारे में
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इस संकलन में सम्मिलित रचनाओं और भाषणों में लेनिन ने धर्म के संबंध में सर्वहारा पार्टी के कर्तव्यों की व्याख्या की है, उन्होंने धर्म के सामाजिक मूल को पूर्ण रूप से उद्धघाटित किया है, धर्म और वैज्ञानिक विश्व दृष्टिकोण की असंगति पर प्रकाश डाला है तथा यह बताया है कि धार्मिक पूर्वाग्रहों पर विजय कैसे पायी जा सकती है।
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