चिरस्मरणीय

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यह कय्यूर की कहानी है जो उत्तरी केरल में मालाबार इलाके में स्थित कसरगोद तालुक का एक गाँव है। यह उस गाँव के किसानों के न्यायोचित संघर्ष की कहानी है। यह कय्यूर के उन चार शहीदों की गाथा है जिन्होंने 1943 में अत्याचारी ज़मींदारों और ब्रिटिश गुलामी के खि़लाफ किसानों के संघर्ष का नेतृत्व किया था और हँसते-हँसते फाँसी के फन्दे को चूम लिया था। यह उन वीरों की कहानी का ही एक हिस्सा है जिन्होंने देश की आज़ादी और ग़रीब जनता की बेहतर ज़िन्दगी के लिए संघर्ष में अपना जीवन न्योछावर कर दिया था। यह हमारे अतीत और भविष्य…

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