अदम्य बोल्शेविक नताशा

20.00

कोई भी सामाजिक बदलाव आधी आबादी की भागीदारी के बिना सम्भव नहीं हो सकता। रूस की अक्टूबर क्रान्ति में भी बड़ी संख्या में स्त्रियों ने हिस्सा लिया था और बहादुरी, सूझबूझ और कुर्बानी की हज़ारों मिसालें कायम की थीं। क्रान्ति के हर मोर्चे पर स्त्रियों ने पुरुषों के कन्धे से कन्धा मिलाकर काम किया था। नताशा समोइलोवा अद्वितीय निःस्वार्थ भावना वाली पार्टी कार्यकर्ता थीं। वे एक बढ़िया, व्यावहारिक वक्ता थीं और मज़दूर औरतों का दिल जीतना जानती थीं। वे बिल्कुल सादी पोशाक पहनती थीं और सरल व्यवहार करती थीं, किन्तु निर्णयों का कार्यान्वयन पूरी निष्ठा के साथ करती थीं —…

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