अभागा

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'अभागा' मक्सिम गोर्की के एक प्रारम्भिक उपन्यास का हिन्दी अनुवाद है। यह उपन्यास अंग्रेजी में 'लकलेस पावेल' या 'आर्फन पाल' नाम से विगत शताब्दी के पूर्वार्द्ध में प्रकाशित हुआ था। उसी अंग्रेजी अनुवाद से नूर नबी अब्बासी ने यह हिन्दी अनुवाद किया था जो 1954 में नवयुग प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित हुआ था। गोर्की के इस प्रारम्भिक उपन्यास में असह्य सामाजिक स्थितियों के दबाव तले पिस रहे समाज के सबसे दबे-कुचले लोगों के जीवन के आधिकारिक चित्रण के साथ ही सर्वहारा मानववाद और क्रान्तिकारी स्वच्छन्दतावाद के वे सभी तत्व मौजूद हैं, जिन्हें संगठित करके 'मां', 'अर्तामानोव्स' जैसे उपन्यासों और आत्मकथात्मक…

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