ख्रुश्चेव झूठा था

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फरवरी 1956 में सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी की 20वीं पार्टी कांग्रेस में दिये अपने “गुप्त भाषण” में निकिता ख्रुश्चेव ने जोसेफ़ स्तालिन पर आरोपों की झड़ी लगा दी। उस समय तक विश्व कम्युनिस्ट आन्दोलन के सर्वमान्य नेता स्तालिन पर किये इस हमले की आड़ में उसने वास्तव में मार्क्सवाद-लेनिनवाद को ही अपने हमले का निशाना बनाया और शान्तिपूर्ण सहअस्तित्व, शान्तिपूर्ण प्रतियोगिता और शान्तिपूर्ण संक्रमण की नीति प्रतिपादित की। अन्तरराष्ट्रीय कम्युनिस्ट आन्दोलन को इस हमले ने भारी नुक्सान पहुँचाया। इसने विश्व इतिहास की दिशा बदल दी। ग्रोवर फ़र ने सोवियत संघ के विघटन के बाद भारी संख्या में प्रकाशित सोवियत…

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Anand Singh

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