लोहू और इस्पात से फूटता गुलाब | A Rose Breaking Out of Steel

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अपने वतन से उजड़ी फ़‍िलिस्‍तीनी क़ौम को दशकों तक लड़ने के बाद देश के नाम पर जो कटी-पिटी और घिरी हुई ज़मीन मिली वहाँ से भी उनको फिर बेदखल कर देने और पूरी क़ौम को मिटा डालने पर इज़रायली ज़ायनवादी आमादा हैं। मगर एक क़ौम के रूप में ज़‍िन्‍दा रहने के उनके बहादुराना संकल्‍प को छह दशक से जारी बर्बर दमन तोड़ना तो दूर कमज़ारे भी नहीं कर पाया है। अपने से कई ताक़तवर दुश्‍मनों के ख़‍िलाफ़ यह संघर्ष बार-बार फ़‍िनिक्‍स पक्षी की तरह अपनी ही राख से फिर उठ खड़ा होता है। हालिया फ़‍िलिस्‍तीनी कविताओं के द्विभाषीय संकलन लोहू और…

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