इंतिफादा: फलस्‍तीनी कवितायें

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वैसे तो आज़ाद फलस्‍तीन के लिए संघर्ष का इतिहास सौ साल से भी ज्‍़यादा का है, लेकिन 1948 में फलस्‍तीनी भूमि पर इज़रायली कब्‍जे़ ने फलस्‍तीनी समाज अैार राजनीति के साथ ही साथ फलस्‍तीनी साहित्‍य की धारा ही बदल दी। साहित्‍य में यह परिवर्तन सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक उत्‍पीड़न की कोख से पैदा हुआ था। सबसे बड़ा दुख देशबदर होने की स्‍िथति का था। इसके बाद जाे फलस्‍तीनी कविता लिखी गयी वह घर से बेघर होने का दर्द, अपने अस्तित्‍व को बचाये रखने का संघर्ष, अपने देश और समाज में वापस लौटने की उत्‍कट अभिलाषा, अतीत  की याद, हमलावरों के…