फाँसी के तख़्ते से

30.00

जूलियस फ़्यूचिक ने यह पुस्तक नात्सी जल्लादों को फाँसी के तख्ते की छाया में लिखी थी। पुस्तक की पाण्डुलिपि का रूप ही लेखक के अदम्य साहस और सूझ-बूझ का प्रमाण है। यह पूरी पुस्तक काग़ज़ के छोटे-छोटे टुकड़ों पर पेंसिल से लिखी गयी थी, जिन्हें लेखक ने एक-एक करके प्राग की पैंक्रेट्स गेस्टापो जेल से एक हमदर्द चेक सन्तरी की मदद से छिपाकर बाहर भेजा था। फ़्यूचिक एक ऐसे व्यक्ति थे जो अपने-आपको धोखा देने से घृणा करते थे और यह जानते थे कि इस रचना को पूरा करने के लिए वह जीवित न रहेंगे और यह कभी भी बीच…

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