तीन टके का उपन्यास

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‘तीन टके का उपन्यास’ में ब्रेष्ट पतनशील पूंजीवादी समाज में व्याषपरिक पूंजीपति वर्ग की घोर अनैतिकता, लालच और उसके “राष्ट्र वाद” की असलियत को एकदम उजागर कर देते हैं। ब्रेष्टज बहुत ही दिलचस्पउ और यथार्थवादी तरीके से पूंजीवादी राष्ट्रीवाद, पूंजीवादी नैतिकता, पूंजीवादी प्रेम, पूंजीवादी रिश्तों , पूंजीवादी संवेदनाओं, पूंजीवादी न्यााय और पूंजीवादी मीडिया की वास्त विकता को सामने लाते हैं। साथ ही ब्रेष्टि अपराध जगत और उद्योग और व्याापार जगत के बीच के गुप्त सम्बान्धों को भी बेपर्दा कर देते हैं। वास्त व में, ब्रेष्ट दिखलाते हैं कि दरअसल व्या्पार वह अपराध है जो बिना किसी सज़ा के चलता रहता…

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