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एक नये सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक-सांस्कृतिक कार्यभार
₹25.00
कला-साहित्य-संस्कृति के क्षेत्र में सृजन और आन्दोलन के सभी कार्यों को आज एकदम नये सिरे से संगठित करने की ज़रूरत है। सर्वहारा क्रान्ति की पक्षधर अवस्थिति से यह बात और भी महत्वपूर्ण है। …हमारे देश और समूची दुनिया के सामने आज यह प्रश्न पहले हमेशा की अपेक्षा अधिक ज्वलन्त और भयावह रूप में खड़ा है… या तो समाजवाद या फिर बर्बरता! कला-साहित्य-संस्कृति की दुनिया में भी यही प्रश्न केन्द्रीय है। …इन्हीं कार्यभारों के संश्लिष्ट-संग्रन्थित समुच्चय को यह पुस्तिका आज के सर्वहारा नवजागरण (रिनेसां) और सर्वहारा प्रबोधन (एनलाइटेनमेण्ट) के आधारभूत और केन्द्रीय कार्यभारों के रूप में निरूपित और प्रस्तुत कर रही…
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