दर्शन, साहित्य और आलोचना

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बेलिंस्की, हर्ज़न, चेर्नीशेव्स्की और दोब्रोल्युबोव क्रान्तिपूर्व के उन रूसी विचारकों एवं लेखकों में से थे जिन्होंने कठिनाइयों और दमन के झंझावात से जूझते हुए दर्शन और साहित्य में जनवादी उसूलों-मूल्यों की मशाल को प्रज्ज्वलित रखा, उसकी रोशनी को और चमकदार बनाया और क्रान्तिकारियों की भावी पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त किया। उनके कृतित्व का महत्व सिर्फ उन्हीं के देश तक सीमित नहीं है। इन चारों के प्रखर विचार और उनका जीवन; अपने सिद्धान्तों पर उनकी अडिग आस्था, बेबाकपन और किसी कीमत पर समझौता न करने का उनका हौसला आज के भारत में साहित्य, दर्शन और समाज के जिन्दा सवालों से जूझने…