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मज़दूरी, दाम और मुनाफ़ा
₹15.00
यह रचना मार्क्स का भाषण है, जो उन्होंने पहले इण्टरनेशनल की महापरिषद की जून, 1865 की बैठक में दिया था। इसमें मार्क्स ने पहली बार बेशी मूल्य के अपने सिद्धान्त का आधार प्रस्तुत किया था। यद्यपि भाषण में इण्टरनेशनल के एक सदस्य, जॉन वेस्टन, के गलत विचारों का खण्डन किया गया था, जिनके अनुसार मजदूरी में बढ़ती से मजदूरों की अवस्था में सुधार नहीं हो सकता और इसलिए ट्रेड-यूनियनों की सरगर्मियों को उनके हितों के प्रतिकूल मानना चाहिए, तथापि वह प्रूदोंपंथियों और लासालपंथियों पर भी चोट करता था, जो मजदूरों तथा ट्रेड-यूनियनों के आर्थिक संघर्षों के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण रखते…
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