मार्क्सवाद की मूल समस्याएँ

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लेनिन के शब्दों में “मार्क्सवादी दर्शन की सर्वश्रेष्ठ व्याख्या” प्रस्तुत करने वाली प्लेख़ानोव की कृति ‘मार्क्सवाद की मूल समस्याएँ’ लम्बे समय से हिन्दी में अनुपलब्ध थी। क़रीब चार दशक पहले इसका हिन्दी अनुवाद पीपुल्स पब्लिशिंग हाउस, दिल्ली से प्रकाशित हुआ था, जो अब अप्राप्य है। प्रस्तुत संस्करण के लिए उसी अनुवाद को आधार बनाया है, लेकिन इसमें काफ़ी संशोधन-सम्पादन करना पड़ा है। आशा है कि प्रस्तुत रूप में यह पुस्तक पाठकों के लिए अधिक सुबोध तथा रुचिकर होगी।

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