सोवियत संघ में पूँजीवाद की पुनर्स्थापना

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करीब डेढ़ दशक पहले सोवियत संघ और पूर्वी यूरोप के देशों में तथाकथित समाजवादी व्यवस्थाओं के ढहने पर पूँजीवादी दुनिया “विक्षिप्त विजयोल्लास” में पागल-सी हो गयी थी। हालाँकि मार्क्सवादी-लेनिनवादी क्रान्तिकारियों और बुद्धिजीवियों की एक प्रबल धारा कई दशक पहले ही यह विश्लेषण प्रस्तुत कर चुकी थी कि सोवियत संघ में स्तालिन की मृत्यु के बाद इतिहास विकास की धारा उलट दी गयी थी और वहाँ पूँजीवाद की पुनर्स्थापना हो गयी थी, लेकिन बुर्जुआ मीडिया और बुद्धिजीवी लगातार इसे समाजवाद के तौर पर ही पेश करते रहे। बड़ी चालाकी से वह सामाजिक साम्राज्यवादी बन चुके सोवियत संघ द्वारा सर्वहारा अधिनायकत्व के…

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