समर तो शेष है

60.00

अन्यायपूर्ण व्यवस्था के विरुद्ध परिवर्तन की लड़ाई में क्रान्तिकारी समूहगानों की शानदार भूमिका और समृद्ध विरासत रही है। आज़ादी के पहले इप्टा के दौर से लेकर अबतक देशभर में सैकड़ों टोलियों द्वारा गाये जाने वाले ऐसे गीतों के एक प्रतिनिधि संकलन की क़ाफ़ी दिनों से महसूस की जा रही ज़रूरत को यह पुस्तक पूरा करेगी, इसका हमें विश्वास है। अलग-अलग जगहों पर गाये जाने वाले ये सभी गीत ऐसे हैं जो कुचल दिये गये दिलों के तारों को झनझनाकर, लोहे की दीवारों के बीच कैद लोगों की सोई हुई आत्माओं को झकझोरकर जगा दें और संघर्षरत लोगों में आशा और…

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