कोहेकाफ़ पर संगीत-साधना

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शशिप्रकाश की कविताओं के इस संकलन ‘कोहेकाफ़ पर संगीत-साधना’ में सापेक्षतः सहज विन्यास और मुखर अभिव्यक्ति वाली कविताओं को शामिल किया गया है, जबकि इसी के साथ प्रकाशित दूसरे संकलन ‘पतझड़ का स्थापत्य’ में गहन वैचारिक कविताओं को स्थान दिया गया है। दोनों ही संकलनों की कविताओं की पृष्ठभूमि गत शताब्दी के अन्तिम दशक से लेकर अबतक के ऐतिहासिक कालखण्ड का ‘’अन्धकार युग’’ है जब प्रतिक्रिया की शक्तियों के अभूतपूर्व बर्बर, विश्वव्यापी वर्चस्व से मानवता आक्रान्त है, लेकिन ‘पतझड़ का स्थापत्य’ की कविताएँ जहाँ समकालीन यथार्थ के भौतिक-आत्मिक पक्षों की गतिकी पर काव्यात्मक-वैचारिक विमर्श प्रस्तुत करती हुई भविष्य-सन्धान करती हैं,…

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