इस पौरुषपूर्ण समय में

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कात्यायनी की कविताएँ यथास्थिति की निर्मम आलोचना, वर्चस्ववादी शक्तियों के हठी प्रतिरोध और हमारे समय की त्रासदियों-विडम्बनाओं भरे अँधेरे से निरन्तर युयुत्सु मुठभेड़ की कविताएँ हैं। साथ ही, उनके काव्य संसार में प्यार, ममता, दुख, उदासी और कामरेडशिप की विरल अनुभूतियों की कौंध है, स्त्री के अन्तर्जगत और बहिर्जगत को मथते यक्षप्रश्न हैं और रोज़मर्रा की ज़ि‍न्दगी की बहुविध चिन्ताएँ और सरोकार हैं, जो हमारे समय का व्यापक वर्णक्रम प्रस्तुत करते हैं और कात्यायनी की कविताओं के आकाश के विस्तार को अनन्य बनाते हैं। कविता को कात्यायनी मानवीय ज़रूरतों की तड़प पैदा करने वाली मानवीय ज़रूरत, भविष्य-स्वप्नों का उत्प्रेरण-केन्द्र और…

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