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सूरज का ख़ज़ाना
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मिख़ाईल प्रीश्विन (1873-1954) न केवल रूसी सोवियत साहित्य के बल्कि समूचे विश्व साहित्य के एक अनुपम-अनन्य लेखक माने जाते हैं। हिन्दी पाठकों के समक्ष उनकी अनूठी रचनात्मकता की एक बानगी प्रस्तुत करने के लिए हम उनकी दो प्रतिनिधि कहानियों का यह संकलन प्रस्तुत कर रहे हैं। जीवन और साहित्य — दोनों में ही प्रीश्विन ने अपनी अस्मिता को बनाये रखा। प्रकृति के सूक्ष्मतम भेदों को जानने और प्रकृति में मानव की आत्मा के उत्तम पक्षों को खोज निकालने की अदम्य उत्कण्ठा उनके सृजन की विशिष्ट अभिलाक्षणिकता मानी जाती है। कहा जाता है कि एक महान कवि विश्व को हमेशा एक…
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